समाचार में सक्रिय माननीय....!!
![]() |
| दैनिक जनवाणी में प्रकाशित.... |
आम आदमी की शिकायत रहती है कि नेता कुछ नहीं करते है। लेकिन उनकी दिनचर्या देख व पढ़कर लगता है कि दुनिया में सबसे व्यस्ततम् यदि कोई है तो यही माननीय ‛जन-गण-मन’ है। कैसे-कैसे चमत्कारिक रूप है इनके ! क्या तो अफलातूनी दिनचर्या रहती है ! और इनके साथी ! इनके पीछे अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दे। अखबारों व मीडिया में भी इनकी खबरें बड़े चाव से छपती व पढ़ी जाती हैं। इनके समाचारों के शीर्षक एक बार पढ़ना शुरू करो तो रूक ही नहीं सकते....!!
आज माननीय ने दिनभर फोटू खिचाओं प्रतियोगिता में भाग लिया ! प्रभारी मंत्री जी का हार-फूल से स्वागत हुआ। चार पांच शोकाकुल परिवारों के घर जाकर संवेदना व्यक्त कर ढांढस बंधाया। चुनावी क्षेत्र में तीन स्कूलों में पौधारोपण किया। कई दिनों से इंतजार कर रहे ग्रामीणों से मिले प्रभारी मंत्री, जमकर लगे नारे ! बापड़े दिनभर क्षेत्र में धूल खाते रहे। शाम तक मंत्रीजी की कार पर एक कुंटल फुल मालाएं सवार हो गई !
एक नया-नया शीर्षक था, “हमारे दल में आए हो तो पार्टी का चाल-चलन व रिवाज अपनाना पड़ेगा”- एक बड़ी राजनैत्री ने दलबदलू नेता से कहा। अगले पृष्ठ पर कुछ ओर पंक्तियां थी... ‛विधानसभावार समस्या समाधान शिविर आयोजित करते रहें !’ एक क्षेत्रीय कद्दावर कार्यकर्ता के यहां एक बेशरम का व एक बांस का पौधा लगाया।
आज के दिन हाईवे से सटी गरीब बस्ती में नंगे-पुंग्गे बच्चों को चड्ढी-बनियान का वितरण किया।
चुनावी क्षेत्र में ग्रामीणों की समस्याएं अनसुनी कर, बहुत से कपड़े बांटे ! क्षेत्र के दौरे पर निकले जनप्रतिनिधि बाढ़ में फंसे, “आम जनता ने चार-पाई के सहारे राजधानी पहुंचाया !”
प्रभारी मंत्री ने दिनभर सैकड़ों समस्याओं से संबंधित ज्ञापन लियें और निजी सचिव को दे दिये। शाम तक सचिव ने आवेदनों को कुड़ादान को समर्पित कर दियें।
“पद और दायित्व बदलते रहते हैं, लेकिन कार्यकर्ता नींव का पत्थर होते है” :- एक तेजस्वी माननीय ने मंच पर भाषण के दौरान यह चमत्कारी वक्तव्य उछाला !
किसी समाचार पत्र में छपता है, ‛रिमझिम फुहारों के बीच क्षेत्र में दिनभर खुली जिप्सी में डमते रहे मुख्यमंत्री !’ “विपक्ष आरक्षण की राजनीति कर रहा है” :- सामाजिक विकास मंत्री ने कहा।
एक दिन में सुबह-दोपहर-शाम को मिलाकर तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को महामहिम राज्यपाल ने दिलाई शपथ।
मानसून सत्र के सातवें दिन भी विपक्षी दलों का दोनों सदनों में जोरदार हंगामा। सरकार ने कहा, विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं। सत्ता पक्ष कह रहा है, “चर्चा से क्यों भाग रहा विपक्ष ?"
वहीं एक राष्ट्रीय अखबार का शीर्षक, “ठहरी हुई संसद और जनता की साँसें फुल रही !”
संपादकीय पृष्ठ पर संपादक के मन की बात:- ‛दो घंटे की “मन की बात” में पीएम ने पांच हजार शब्दों में जन की बात की ! श्रोता सुनकर अभिभूत हुए।’
सदन में गूंजा ‛खेला होबे’, विपक्षी सदस्यों ने खेल-खेल में आसंदी पर फेंके कागज। सदन की कार्यवाही जरूरी कागजों के फाड़ने से रूकी। सदन की मर्यादा भूले सांसद, स्पीकर की ओर फेंके पर्चे...! ‛संसद में तनातनी आर-पार की ओर बढ़ी !’
अगले पृष्ठ पर बड़ा सा शीर्षक:- एक बड़े नेता ने कहा, “जासूसी, महंगाई और किसानों पर समझौता नहीं ! वहीं पृष्ठ के बुंदे में छपता है, “दल के ई-चिंतन में दल के बड़े नेता का कार्यकर्ताओं ने उद्बोधन सुना।" आखिर में आता है, ‛सभी क्षेत्रीय दलों पर भरोसा करें राष्ट्रीय दल, रचेंगे इतिहास:- एक राज्य स्तरीय राजनैत्री का बयान !’
अब जब इस तरह के आश्चर्यजनक समाचार शीर्षक पढ़ने-देखते में आते है तो लगता ही नहीं, कि हमारे माननीय कुछ काम नहीं करते है ! वे तो हर शीर्षक में भी कितनी सक्रियता से अपने कर्तव्य का निर्वाह करते है....!!
भूपेन्द्र भारतीय

No comments:
Post a Comment