Saturday, May 14, 2022

स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव में #क्रांतिदूत शृंखला:- भाग-०१ (झाँसी फाइल्स)

 स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव में #क्रांतिदूत शृंखला:- भाग-०१ (झाँसी फाइल्स)

         



क्रांतिदूत शृंखला के पहले भाग झाँसी फाइल्स में लेखक डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने बड़े ही सरल व सहज कथामय शैली में क्रांतिकारियों के जीवन का रोचक चित्र खींचा है। इस झाँसी फाइल्स भाग में चंद्रशेखर से चंद्रशेखर आज़ाद बनने की ऐतिहासिक घटना को कथामय तरीक़े से प्रस्तुत किया गया है। अपने संगठन को कैसे चलाना व मास्टर जी का संगठन के लिए समर्पण पढ़कर पाठक चौंक जाऐगा। भारत की वर्तमान युवा पीढ़ी इस पहले भाग को ही पढ़कर समझ सकती है कि हमारे क्रांतिकारियों ने देश को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराने के लिए क्या नहीं किया।

इस पहले ही भाग में ‛राष्ट्रशाला’ व ‛राष्ट्रशिक्षा’ जैसे शब्दों के माध्यम से “राष्ट्रवाद” का बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश दिया गया है तथा राष्ट्रप्रेम व मातृभूमि के लिए अपना संपूर्ण जीवन कैसे भगतसिंह, चंद्रशेखर आज़ाद, सुखदेव, राजगुरु, मास्टर जी, भगवती आदि जैसे महान क्रांतिकारियों ने राष्ट्र को स्वतंत्र कराने के लिए लगा दिया। लेखक ने अपनी विशिष्ट कथन शैली से इन महान क्रांतिदूतों का अपने देश के लिए प्रेम व जुनून को बेहद सरल अंदाज में प्रस्तुत किया है।

जिस समय भारत “आजादी के अमृत महोत्सव” को बड़े ही गर्व से मना रहा हो ओर उसमें इस क्रांतिदूत शृंखला आना, बहुत ही अच्छा व महत्वपूर्ण साहित्यिक कार्य है। पहले भाग में ही इस बात की प्रबल संभावना दिख रही है कि यह शृंखला सफल होगी व आने वाली पीढ़ीयों को भी बड़े रोचक ढ़ंग से यह बताने में सफल रहेगी कि भारत को अंग्रेजों से स्वतंत्र कराना व उसके लिए संघर्ष करना कितना साहस का कार्य रहा था। कितने ही गुमनाम बलिदानीयों का माँ भारती को आजाद कराने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष योगदान रहा था।

इस पहले भाग को पढ़ने में आपको मुश्किल से दो घंटे भी नहीं लगते हैं। बेहद सरल भाषा व स्वतंत्रता का समर प्रवाहमय छोटे छोटे पाठों में क्रांतिदूत के पहले भाग झाँसी फाइल्स में लेखक लिखने में सफल रहे है। इसी झाँसी फाइल्स से मुझे पहली बार पता चला व मैं दावे के साथ कहना चाहूंगा कि बहुत कम पाठक जानते होगें कि “मास्टर रुद्रनारायण जी, जिनको बुंदेलखंड में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का भीष्म पितामह कहा जाता है, झाँसी के सरस्वती पाठशाला में कला अध्यापक थे। इन्हीं मास्टर जी ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को झाँसी से सदाशिव राव मलकापुरकर जी, भगवान दास माहौर जी, और विश्वनाथ गंगाधर वैशम्पायन जी जैसे शिष्यों से नवाजा था जिन्होंने आगे चलकर अंग्रेजों की नींद उड़ा कर रख दी थी।” क्या आप इन क्रांतिदूतो को जानते हैं ? ऐसे ही गुमनाम आजादी के दीवानों के बलिदान की रोचक ऐतिहासिक महत्व को लेखक ने यहां कथामय ढंग से सुंदर सरल भाषा में इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों के लिए लिखा है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम व क्रांति का पहला बड़ा साक्षी झाँसी नगर भी रहा है। यही से 1857 की क्रांति की सबसे बड़ी नायिका झाँसी की रानी ने अंग्रेजों से जबरदस्त आजादी की लड़ाई लड़ी थी जो आज भी हमारे बच्चों को याद है लेकिन बहुत से ओर भी क्रांतिदूतो की कहानियां रही है जिनके साथ इतिहास न्याय नहीं कर पाया है। शायद इस क्रांतिदूत शृंखला से वह न्याय हो सकता है ऐसी मुझे उम्मीद इस शृंखला का पहला भाग झाँसी फाइल्स पढ़कर जगी है।

यह पहला भाग ११७ पृष्ठ में ही है लेकिन जब आप पृष्ठ ४२ पर अहिंसा व हिंसा का सरल अंतर पढ़ेंगे तो आपको इस शृंखला को पढ़ने का ओर मन होगा और यह भी पता चलेगा कि आजादी सिर्फ़ अहिंसा के द्वारा ही नहीं मिली है। इसके लिए लाखों क्रांतिकारीयों ने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्र के लिए बलिदान कर दिया। इसका ही ब्रह्मचारी वाला पाठ बड़ा ही रोचक है। वर्तमान में जिस रफ्तार से हर कोई हर छोटी मोटी घटना पर फोटो व विडियों बनाता रहता है उस काल में क्रांतिकारी अपने लक्ष्य के लिए अपना पूरा जीवन ही गुमनामी में राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए बलिदान कर देते थे।

      


स्वतंत्रता संग्राम के ऐसे कितने ही रोचक ऐतिहासिक तथ्य इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने बताये है। इस पहले भाग के अंत में लेखक ने कई महत्वपूर्ण पुस्तकों की सूची दी है जिनके माध्यम से यह पुस्तक लिखी गई व इस विषय को समझने के लिए पाठक ओर विस्तार से इन्हें पढ़ सकता है। अंत में यही कहना चाहूंगा कि क्रांतिदूत के आने वाले भागों में लेखक की जिम्मेदारी ओर बढ़ गई है। यह शृंखला निरंतर चलते रहना चाहिए। युवा भारत इसे जरूर पढ़े। लेखक की बुंदेलखंड से बाली तक की यात्रा के बाद अब इस महत्वपूर्ण व ऐतिहासिक क्रांतिदूत यात्रा के लिए शुभकामनाएं व बधाई।
जय हिंद


पुस्तक : क्रांतिदूत (भाग-1) झाँसी फाइल्स
लेखक: डॉ. मनीष श्रीवास्तव
प्रकाशक : सर्व भाषा ट्रस्ट
मूल्य : 150


समीक्षक
भूपेन्द्र भारतीय 
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com 

4 comments:

  1. सुंदर समीक्षा भूपेंद्र जी

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  2. किसी भी लेखक के लिए सबसे सुखद पल होते हैं जब उनके पाठक उनके काम की सराहना करने के साथ-साथ सुझाव भी दें। मुझे आशा है आप अपने शब्दों द्वारा मुझे प्रोत्साहित करते रहेंगे। इस समीक्षा के लिए आपका आभार!

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    1. बहुत ही ऐतिहासिक कार्य, शुभकामनाएं व हार्दिक बधाई डॉक्टर साहब

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