Monday, March 7, 2022

चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं....!!

 चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं....!!

      



बस कुछ ही दिनों में चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं। समझदार मतदाताओं आपका कार्य पूर्ण हुआ। अब पार्टी व कुर्सी पकड़कर खड़े होने की बारी नेताओं की है। मतदाताओं माना आपने लोकतंत्र को ही चुना होगा ! पर आपको अगले पांच वर्षों तक कौन कितना व कितनी मात्रा में चुना लगाने वाला है, इसकी कल्पना मेरे जैसे बाल-गोपाल व्यंग्यकार के बस में नहीं है। हाँ आप स्वयं चाहे तो हमारे लोकतांत्रिक राजनीतिक इतिहास से थोड़ा बहुत अंदाजा लगा सकते हैं।

वैसे आजकल नतीजे कैसे भी हो, चौंकाने वाले ही होते हैं। चट मंगनी-पट बिहा का जमाना जो है। चौंकाने वाले नतीजे हमेशा से चौंकाने वाले ही रहे हैं। बचपन में मैं अक्सर इन नतीजों के कारण आस-पड़ोस वालों की नजरों के सामने परिणाम भुगत चुका हूँ। और जब से मन मारकर विवाहित हुआ हूँ ! इन नतीजों से ओर भी पारिवारिक(फेमिलियर) होने का आदि हो गया हूँ। टीवी चैनल वाले तो कुछ वर्षों से चौंकाने वाले नतीजों का बम फोड़ रहे हैं। हमारे कस्बाई जीवन में तो सालों से हर स्कूली परीक्षा परिणाम में चौंकाने वाले नतीजे आते रहे हैं। और फिर इन नतीजों के बाद पिताजी का मेरे सम्मान व वाहवाही में संज्ञा, सर्वनाम व विशेषण का उपयोग कर सारे महोल्ले के सामने पारितोषिक देने पर चौंकाने वाले नतीजे सबको आसानी से पता चल जाते थे। वह आजकल के कोरोना काल में आगे बढ़ावों शिक्षा नीति के कारण नतीजों जैसा जमाना नहीं था।

चौंकाने वाले नतीजों का अंदाज़ा लगाकर एक बार फिर कुछ राग रूदाली करने वाले माननीयों ने ईवीएम का पोथी पांनड़ा पहले से ही निकाल लिया होगा। बेचारी ईवीएम एक बार फिर बदनाम होगी। शायद मुन्नी इतनी बार बदनाम नहीं हुई होगीं, जितनी बार अब तक ईवीएम हो गई है। टीवी चैनल वाले रूझानों के झुनझुने लेकर तैयार ही बैठे हैं। बस चुनाव आयोग के डंडे की मजबूरी है, नहीं तो अबतक इन झुनझुनों की मधुर ध्वनि से कितने ही नेताओं की नींद उड़ जाती। वैसे पक्ष-विपक्ष की नींद तो मतदाताओं के मौन के कारण से भी उड़ी हुई होगी। पर अब कौन इनसे इनके हालचाल पूछने की हिम्मत करें ?

टीवी चैनलों पर हर एक घंटे में “चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं....!!” वाली खबर बार बार चलाकर चैनलों की जैसे तैसे साँसें चल रही थी। वो तो गनीमत है कि बीच में रूस-यूक्रेन का युद्ध आ गया, नहीं तो पांच राज्यों का चुनावी रूझान युद्ध सतत चलता रहता। फिर भी बीच बीच में चौंकाने वाले नतीजों की खबरें चलती ही रहती हैं। वहीं युद्ध भूमि से भी चौंकाने वाले ही नतीजें आ रहे हैं। जहां यूक्रेन ने एक मालवी कहावत “बान के भरोसे बियाव मांडना” की तरह जबरन ही ओखली में मुँह दे मारा और अब चौंकाने वाले नतीजों पर नॉटो के बनियों के कारण पूरा विवाह बिगाड़ लिया। बेचारी जनता एक बार फिर चौंकाने वाले नतीजों के फेर में गलत फेरे पड़ गई। वहीं इस चौंकाने वाली परिस्थिति में भी विदेश में फंसे अपने यहां के कुछ सयाने मेहमानों की चौंकाने वाली खबरें आ रही है।

खैर “चौंकाने वाले नतीजों” से याद आया; मैंने भी एक बार स्वयं की पत्नी को प्रसन्न करने के लिए चाय बनाने की कोशिश की थी। फिर क्या था ! दो सप्ताह तक किचन बर्तनों से चौंकाने वाले नतीजें आते रहे। उन दिनों हम भी थोड़े बहुत तो होशियार थे ही। उसके बाद कभी किचन तरफ झांका ही नहीं। लेकिन अब जब भी कहीं से सुनता हूँ कि चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं ! ऐसी घड़ी में मैं वैसा ही चौंक जाता हूँ! जैसे किसी भी चुनाव में कोई उम्मीदवार परिणाम आने की घड़ियां गिनता रहता है और “चौंकाने वाले नतीजे आने ही वाले हैं” वाली खबर टीवी चैनलों पर दनादन चलती रहती हैं....!!


भूपेन्द्र भारतीय 
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com

No comments:

Post a Comment

हिंदू उत्ताराधिकार विधि पर पुनर्विचार हो....

हिंदू संस्कृति व समाज व्यवस्था में दो सबसे महत्वपूर्ण संस्था है पहली परिवार व दूसरी विवाह। पहला हिन्दू परिवार कब बना होगा यह अनंत व अनादि का...