Saturday, January 7, 2023

भय्या रिचार्ज होकर फिर आये.....!!

 भय्या रिचार्ज होकर फिर आये.....!!

             



आखिर भय्या एक लंबी यात्रा से रिचार्ज होकर फिर नई यात्रा के लिए आ गए। इस लंबी यात्रा में भय्या को कई नये अनुभव हुए। भय्या ने पहली बार अपने क्षेत्र से निकलकर दूसरे क्षेत्र का विकास देखा। इस यात्रा में भय्या ने पहली बार जाना कि उन्हें तो बहुत कुछ पता नहीं था। उन्हें तो अब भी बहुत कुछ जानना है। उनके सत्ता में ना होने पर भी विकास हो रहा है। विकास अपनी यात्रा में दौड़ लगा रहा है।
एक लंबी युवा उम्र के बाद भी भय्या को अभी ओर युवा रहना है। दक्षिण भारत की अपनी इस यात्रा में भय्या एक जोड़ी कपड़ें में यात्रा पूर्ण करते है। उनका अपना एक ड्रेस कोड है। वे अपनी इस यात्रा को यात्रा नहीं, मिशन बताते है। वे यात्रा में हर एक सहयात्री से गले मिल रहे हैं और वहीं इस मेलजोल भरी मोहब्बत को मिडिया गले पड़ना बता रहा है !

अपनी यात्रा में भय्या हर पल जोर-जोर से हाथ हिलाते चलते हैं। बीच-बीच में वे दौड़ने का भी अभ्यास करते हुए दिख जाते है। उनकी यात्रा में हर पड़ाव पर राजनीतिक प्रवासी पक्षी भी देखे जा सकते हैं। भय्या उनसे गले पड़ते हुए गंभीर हो कर बुद्धिजीवीयों जैसी बातें करते-करते चलते है। भय्या की यात्रा में बड़े-बड़े अभिनेता-अभिनेत्रियां भी देखे जा सकते है। भय्या ने यात्रा के लिए अपना विशेष रुप बनाया है। वामपंथियों जैसी खिचड़ी दाढ़ी का विशेष सृजन किया है। वे यात्रा में बुद्धिजीवीयों जैसा अवतार लिये चलते है। चाचा नेहरू की तरह वे बच्चों से बात करते है। उन्हें यात्रा में शामिल करते है। उनके साथ सड़क पर फुटबॉल खेलते है। उन्हें गोद में लेते है। जैसे बच्चों में एक बच्चा खूब रंग जमाता है। यात्रा में कभी भावुकता , तो कभी करूणा का बघार लगता है। यह सब समाचार चैनल वाले रूक-रूक कर बताते हैं। भय्या की यात्रा में बहुत कुछ जोड़-घटाव चल रहा है...!

यात्रा के माध्यम से कुछ जोड़ने की बात की जाती है ! लेकिन पीछे-पीछे भय्या का दल टुटता जा रहा है। कई का दिल भी। हो सकता है इससे उनके मन में खरोंच भी आई हो। भय्या को इसका कोई मलाल नहीं है। वे अपने मिशन पर सतत आगे बढ़ते जा रहे है। वे एक जोड़ी कपड़े में मोहब्बत की बात करते है। उनका कहना है कि नफरत के माहौल में वे मोहब्बत की यात्रा पर है। “भय्या इस यात्रा के माध्यम से राजनीति में रिचार्ज होना चाहते है। लेकिन वे अपने ही बयानों से बार-बार डिस्चार्ज हो जाते है।” उनकी राजनीतिक यात्रा को रिचार्ज करने में अब तक कितनी ही बेटरीयां डिस्चार्ज हो गई हैं।

भय्या अपनी लंबी यात्रा के बाद कुछ दिन अवकाश भी लेते है। अवकाश लेने की भय्या की यह बहुत पुरानी आदत है। पहले बच्चे गर्मियों की छुट्टी में दादी-नानी के यहां जाते थे । लेकिन भय्या अवकाश लेकर सिर्फ़ अपनी नानी के पास अवकाश का आनंद लेने जाते है। उनके इस राजनीतिक अवकाश पर कई यात्रीयों की राजनीति अवकाश पर चली जाती हैं। उनकी कक्षा का परिणाम बिगड़ जाता है, पर उन्हें अपनी यात्रा की ही चिंता होती है।
कितने ही राजनीतिक प्रवासी नेताओं की राजनीति बिगड़ जाती हैं। लेकिन जैसे ही भय्या अवकाश से रिचार्ज होकर आते है। यात्रा में जोश आ जाता है। फिर तो वे सर्दी-गर्मी-बरसात सबसे भीड़ जाते है। उनके सामने कोई नहीं ठहरता है। वे मोहब्बत का भाषण देते है। फिर गले मिलने व प्यार लुटाने की यात्रा आगे बढ़ती है। फिर नये-नये राजनीतिक प्रवासी पक्षी यात्रा में शामिल होने लगते हैं। अपने मूल प्रवास से उनके द्वारा लाये गए वैचारिक खाद-पानी का असर यात्रा में दिखता है। इस सर्दी में भय्या अपनी यात्रा में राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए राजनीतिक गर्मी का आह्वान करते है। लेकिन भय्या की यात्रा के भूतकाल के बर्फीले तूफान यात्रा में गर्मी का माहौल बनना मुश्किल लगता है। लगता है भय्या के लिए उत्तर से दक्षिण की ओर यात्रा करना ही लिखा है। देखते हैं यह यात्रा कब तक चलती है....!!


भूपेन्द्र भारतीय 
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com 

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