Saturday, May 3, 2025

सरकारी सेवा में अपार सफलता के बाद...!

 सरकारी सेवा में अपार सफलता के बाद...!


लचकलाल ने सरकारी सेवा में लंबा समय काटा और अब सरकारी सेवा में अपार सफलता के बाद वे निजी सेवा क्षेत्र में प्रवेश का लगभग मन बना चुके हैं। ‛वैसे सेवा करने का मन लचकलाल का सरकारी सेवा में रहते हुए भी खूब होता रहा पर सरकारी व्यवस्था उन्हें सेवा नहीं करने देती थी। वह अपने संपूर्ण सरकारी सेवा काल में नौकरी बचाने में ही इतने व्यस्त रहे कि सेवा करना ही भूल गए ! हाँ इस स्वर्णिम कार्यकाल में उन्होंने अपने सरकार व लोकतंत्र के तीनों स्तंभों की सेवा बहुत की, भले जनता की सेवा से वंचित रह गए।’ 


ऐसे में अब सेवानिवृत्ति के बाद लचकलाल को जनता की सेवा की चिंता सता रही है। उनकी पेंशन उन्हें बार बार झकझोरती है कि “हे, पार्थ -तुम अब जनता की सेवा करो। तब ही तुम्हें मुक्ति मिलेगी। मोक्ष का मार्ग यही है। यही तुम्हारा परम कर्त्तव्य है। तुम इस सेवा के लिए निजी क्षेत्र में कूदो। इनवेस्ट करो। यह युग इनवेस्टमेंट का है। मैं पेंशन तुम्हें भवसागर पार नहीं करा सकती हूँ। ” ऐसे विचार लचकलाल के मन को बारंबार उद्वेलित कर रहे हैं। इसमें इनवेस्टमेंट कंपनियों व आनलाइन इनवेस्टमेंट विज्ञापनों की अपनी अलग भूमिका है। भू-माफिया अलग दाने फेंक रहे हैं। उधार लेने वालों का जाल तैयार रखा है। ऐसे में लचकलाल को समझ नहीं आ रहा है कि वह अपनी सरकारी सेवा के दौरान कूटे धन को दूसरों के निजी क्षेत्र में कैसे इनवेस्ट(निवेश) करें। उसने तो जीवनभर कभी टेबल के नीचे से तो कभी सरकारी कार्यालय के पीछे से लिया ही है, उसे लगाना आता ही नहीं। बाजार में धन लगाने के लिए वह किस पर विश्वास करें। यह ज्ञान वह कहाँ से प्राप्त करें। आखिर आनलाइन विज्ञापनों पर भरोसा करें तो कैसे करें ? भू माफियाओं को वह सरकारी सेवा के समय से जानता है! लचकलाल ने सरकारी सेवा के समय किसी पर विश्वास ही नहीं किया था। सरकारी नौकरी में हमेशा ज्ञान देने की आदत ही रही। अब भला ज्ञान प्राप्त करने के लिए क्या करें ? लचकलाल को इतना तो पता है कि ‛किसी भी तरह का ज्ञान व शिक्षा प्राप्त करने के लिए विनम्र होना पड़ता है। लेकिन उसने तो सरकारी सेवा रौब से की है। वह सरकारी सेवा में कभी झुका नहीं। भला अब वह कैसे झुकेगा। लचकलाल की स्थिति भी पुष्पा जैसी हो गई है कि साला लचकलाल झुकेगा नहीं !' 


लेकिन लचकलाल का जीवन अब तक सफलता से भरपूर रहा है। सरकारी सेवा की अपार सफलता के बाद वह अब किसी भी स्थिति में रिटायरमेंट को भी सफलतम बनाना चाहता है। पेंशनर होकर भी सफल उद्यमी होना चाहता है। अपने जीवन को दूसरे के लिए आदर्श बनाना है। जिससे कि लोग उसकी चर्चा करें। उसके मरने पर जनता उसकी स्मृति में व्याख्यानमाला आयोजित करें। बुद्धिजीवी उसके जीवन के अनछुए पहलुओं पर पुस्तक लिखे।चर्चा करें। उसके जीवन से युवा प्रेरणा ले। उसका सम्मान हो। सरकार तक फिर उसका लोहा माने। जैसे सरकारी सेवाकाल में भी लचकलाल की सेवा का लोहा सरकार को मानना पड़ा था। ऐसे में लचकलाल सफल उद्यमी बनना चाहता है। “सहकारिता व समाजवाद के रथ से उतर कर अब लचकलाल पूँजीवाद की बूलेट ट्रेन में सवार होना चाहता है। वह निजी क्षेत्र में सेवा के माध्यम से सफलता के नये कीर्तिमान स्थापित करना चाहता है।" वह यह सब करने के लिए कुछ भी कर सकता है। यहां तक की वह ‘अपनी पेंशन तक फूंककर सफलता की गंगा में नहाना चाहता है।’ 

आखिर उसे अपने जीवन में अपार सफलता की आदत जो रही है। वरिष्ठ नागरिक व पेंशनर के तौर पर भी वह सफलता का स्वाद फिर चखना चाहता है। इसके लिए उसने आठ-दस सामाजिक व धार्मिक समितियों की सदस्यता ले ली है। सेवानिवृत्ति के बाद से इन समितियों में वह प्रतिदिन सक्रियता से अपना तन-मन-धन का योगदान दे रहा है। इस राह में उसकी बीपी-सूगर जैसी बिमारी भी आड़े नहीं आ सकती है। अब वो दिन दूर नहीं जब लचकलाल एक बार फिर अपने जीवन के इस अंतिम पड़ाव में भी सफलता के नये शिखर छूने वाला होगा। लगता है एक बार फिर लचकलाल की सेवा भावना से उसके जीवन में अपार सफलता आने ही वाली है...



©भूपेन्द्र भारतीय 

205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,

जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)

मोब. 9926476410

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