Tuesday, April 20, 2021

टीका-उत्सव में टीका-टिप्पणी....!!

 मैं सामान्यतः टीका-टिप्पणी से बचता हूँ। ओर जब कोरोना का टीका लग रहा है तो किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करना चाहिए। चुपचाप टिका लगा लो और अपनी फटी बनियान के साथ टीका लगाते हुए फोटो खींचाकर घर बैठो ! वैसे भी मेरे जैसे घरघुस्सू टिप्णीकार की टीका टिप्पणी से क्या होने वाला है ! ज्यादा से ज्यादा संपादक की कृपा से स्वतंत्र टिप्णीकार मान लिया जाऊंगा। या फिर जबरन की टिप्पणी पर किसी तरह का साहित्यिक टूंटा भी खड़ा हो सकता है।


कोरोना कर्फ्यू में घर पर निवरे बैठे-बैठे फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम पर किसी मामलें में टिप्पणी करने से अपने आप को रोके रखा हूँ। लाकडाउन का कोई कितना ही विरोध करें मैं तो चूप बैठने में ही भला समझ रहा हूँ। कोई रैली-रैला-खेला कुछ भी करे मुझे तो अपने ही कमरे में टीका लगाकर बैठना है। टीवी चैनलों के उकसावे में नहीं आऊंगा। भले कितने ही मजदूरों का रैला घर के पास से निकल रहा हो। अपनी खिड़की में काढ़ा पीते हुए भी किसी भी तरह की टिप्पणी नहीं करना है।

किसी भी राज्य में चुनाव हो, कहीं भी कैसा भी महोत्सव हो, मुझे तो बस अपने घर पर टीका महोत्सव का आनंद लेना है ! कोई कैसा भी ट्वीट करें, किसी भी बुद्धिजीवी के झांसे में नहीं आना है। न ही कोई संपादकीय लिखना है न ही कोई व्यंग्य व न कोरोना-लाकडाउन पर कोई कविता-वविता लिखना है। न ही व्यंग्यकारों से सरकार व लालफीताशाही की कोरोना नीति पर बात करना है। नोट व वोट के चक्कर में कोई टीका टिप्पणी बिल्कुल नहीं करना है। सिर्फ़ नोटा की तरह निष्पक्ष रहना है।


भले ही कोई भला मानस कैसे भी व्यंजन बनाकर फेसबुक, ट्विटर पर डाले, मुझे कोई भी जवाबी टिप्पणी नहीं करना है। अपने कमरे में रूखी सूखी खाकर काम चलाना हैं। जरूरी काम से यदि घर से निकला भी तो सभ्य नागरिकों को मास्क के बारे में कोई ज्ञान नहीं देना है। किसी भी तरह का काढ़ा पत्नी बनाकर लाये तो सोशल मीडिया पर साझा नहीं करना है, बस चुपचाप बगैर किसी चूचपड़ के गटक जाना है। मेरी किसी भी पोस्ट पर कोई कैसी भी टीका टिप्पणी करें, मुझे साईलेंट मोड में रहना है।

सरकार कब तक कोरोना कर्फ्यू रखेगी, आगे बढ़ायेगी, रात का लाकडाउन है या सप्ताह में दो दिन जैसी छद्म टिप्पणियां नहीं करना है। टीका लगने पर क्या लक्षण आते हैं उसपर भी कोई लक्षणात्मक टिप्पणी नहीं करना है। प्रतिदिन कोरोना के कैसे भी और किस तरह के भी कोरोना पोजिटिव-नेगेटिव आकड़े आये, मुझे अपने आप को बगैर किसी टीका टिप्पणी के सकारात्मक रखना है ! ओर अंत में जब इतनी सब बातें अपने आप से ही कहने के लिए टंकित कर रहा हूँ तो फिर अन्य कोई टीका टिप्पणी नहीं करना चाहता हूँ।


भूपेन्द्र भारतीय

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