लचकराम जी का सैंपल सर्वे....!!
नईदुनिया के अधबीच में....
मेरी बस्ती के दूसरे छोर पर लचकराम जी रहते है। शाम को उधर घुमने गया तो मिल गये। अचानक से कहने लगे, भाई साहब “आजकल सभी ओर मिलावट का माल मिल रहा हैं।” सावधान रहें ! मैंने पूछा, क्यों आपको यह सब कैसे पता ? कहने लगे, मैं खाद्य पदार्थों की जाँच करने अपने विभाग की ओर से गया था। जितने भी सैंपल लिये सब सर्वे में फेल आ रहे हैं। मुझे समझाते हुए फिर कहने लगे कि इस बार भी त्यौहार पर अपने घर की ही चीजें खायें। बाहर बहुत ज्यादा मिलावट का काम चल रहा है।
मैंने कहा;- किधर मिलावट नहीं है ? लचकराम जी। पूरे कुएं में भाग मिली हुई है। मेरे ऐसा कहने पर वे थोड़ा चौंके और फिर कहने लगे, बात तो आप भी बुद्धिमानी वाली कर रहे हो। आजकल तो साँस लेने तक में लघुशंका होती है। क्या समय आ गया है ? जिस भी चीज का सैंपल लो, “वह अपने मानक स्तर से नीचें आ गई है !” मैंने कहा, क्यों न खाद्य पदार्थ बेचने वालों के साथ साथ हर सरकारी विभाग का सैंपल सर्वे करना चाहिए ? लचकराम जी हँसने लगे, आप भी भाई साहब - पूरी व्यवस्था में ही दोष निकाल रहे हैं ? मैंने कहा- दीपावली पर ही खाद्य पदार्थों के सैंपल सर्वे क्यों लिये जाते हैं ? बाकी सालभर क्यों नहीं ? उन्होंने कहा बात तो सही है। लेकिन सालभर सर्वे हो तो फिर खायेंगे क्या ! शिष्टाचार भी तो कोई चीज है। ऐसे से तो हमारी व्यवस्था की अर्थव्यवस्था बिगड़ जाऐगी।
लचकराम जी फिर आगे कहने लगे, हम तो सालभर भी सर्वे कर सकते हैं। लेकिन फिर ऊपर से फोन आ जाते हैं कि फलाने के यहां कुछ दिन नहीं जाना है, “वह अपना आदमी है !”
खाद्य पदार्थों के सर्वे की बात चल ही रही थी कि लचकराम जी का बालक कुछ खाने के लिए ले आया। लचकराम जी कहने लगे लिजिये भाई साहब;- ‛लख्खूचंद मिष्ठान वाले’ के यहां की मिठाई है। मैंने थोड़ा सकुचाते हुए पूछा, लचकराम जी- अभी तो आप कह रहे थे कि बाजार में मिलावट जोरों-शोरों पर है ? और अब यह लख्खूचंद मिष्ठान वाले की मिठाई ? लचकराम जी कहने लगे, अरे भाई साहब आप भी बड़े भोले है ! भला ”लख्खूचंद मिष्ठान वाले” जैसे नगर के नामी-गिरामी मिठाई दुकान वाले की मिठाई में कोई मिलावट हो सकती हैं ? वे नगर की कितने वर्षों से सेवा कर रहे हैं। हमारे नगर के बड़े समाजसेवी है। भले आदमी है।
फिर मैंने कहा, अच्छा पर कुछ देर पहले आप ही कह रहे थे ? इसलिए पूछ लिया।
लचकराम जी धीरे से कहने लगे- “भाई साहब लख्खूचंद जी हमारा विशेष ध्यान रखते है। “अपने आदमी है।” हर साल दीपावली पर उनके यहां से बहुत से स्वादिष्ट मिष्ठान के पैकेट व बहुत से उपहार आ जाते हैं।” अब आप ही बताईए भाई साहब, ऐसे भले सेठ की दुकान के खाद्य पदार्थों का सैंपल सर्वे कैसे करें ? लचकराम जी आगे कहने लगे आप भी कहाँ मिलावट-उलावट की बात लेकर बैठ गए ! आप तो मिठाई का आनंद लो। आखिर में मैं उनके यहां से आने लगा तो मुझे भी ‛लख्खूचंद की दुकान’ की मिठाई का एक पैकेट पकड़ा दिया ! मैं अपने घर आया तो सैंपल सर्वे, मिलावट की बात को सोचते हुए व मिठाई के पैकेट को अपने हाथ में लिये हुए किंकर्तव्यविमूढ़-सा बहुत देर तक घर के दरवाज़े पर खड़ा रहा....!!
भूपेन्द्र भारतीय
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com
No comments:
Post a Comment