Sunday, December 4, 2022

अध्यक्षीय भाषण....!!

 अध्यक्षीय भाषण....!!

   
      



वे बोलने में शुरू से तेज है। बचपन से बोलते-बोलते वे कब भाषण देने की अवस्था में आ गए, उन्हें ही नहीं पता चला ! इन दिनों वे भाषण तो देते है लेकिन वे हर विषय पर भाषण दे सकते है। धारा प्रवाह दे सकते है। उनके बोल दिनोंदिन ओजस्वी भाषण होते जा रहे है। पहले उन्हें सिर्फ़ उनकी कॉलोनी व नजदीकी विद्यालयों में ही भाषण देने बुलाया जाता था । लेकिन आजकल उन्हें सरकारी आयोजनों में भी भाषण देने के लिए बुलाया जाता है। निमंत्रण पत्र में उनके नाम के आगे “अध्यक्षता” शब्द ना हो, तो वे उस कार्यक्रम में नहीं जाते। इस कारण उन्होंने इन दिनों अपना मीटर अब अध्यक्षीय भाषण के अनुसार ही तय कर लिया है।

उनका अध्यक्षीय भाषण हर विषय पर धाराप्रवाह रहता है। हर भाषण में कहीं ऐसा नहीं लगता है कि कुछ नया कहा जा रहा है। सुनने वाले हर सभा में सहज ही रहते हैं। उन्हें अपनी बुद्धि पर जोर भी नहीं लगाना पड़ता है। श्रोतागण उनकी सभा में रात्रि के तिसरे-पहर की निंद का आनंद लेते हैं। आयोजन कर्ता से श्रोतागण निवेदन करते हैं कि उन्हें अगले आयोजन में भी अध्यक्षीय भाषण के लिए आमंत्रित करें ! नगर में बच्चों को भी उनका भाषण रटा गया है। कुछ बच्चें तो उनके भाषण शुरू होने से पहले ही उनकी कालजयी पंक्तियों का वाचन शुरू कर देते हैं। वे अपने नगर के रेडीमेड अध्यक्ष मान लिये गए है। कितनी ही आयोजन समितियाँ व संगठन इसके कारण आसानी से समाज कार्य के माध्यम से उनके नगर का कल्याण कर रही हैं। वे इसके कारण ही अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते है। उन्हें लगता है, नगर के विकास का भार उनके ही कंधों पर है !

उनके इस अध्यक्षीय भाषण से समाचार पत्रों व टीवी चैनलों को भी सुविधा रहती हैं कि उन्हें अपने विशेषांक विचार पृष्ठ पर ज्यादा मेहनत नहीं करना पड़ती हैं। उनके भाषणों को सुनने वाले लाखों-करोड़ों में है। वे सभी जानते हैं कि इनके भाषणों का सार क्या है। वे अपने अध्यक्षीय भाषणों में कुरुक्षेत्र में खड़े श्रीकृष्ण की तरह विश्वरूप वाली आभा में रहते है। कितने ही श्रोतागण उनकी कांति व तेज से मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। उनके भाषण पर वाह-वाह से सभा मंडल का वातावरण किसी चक्रवर्ती सम्राट की राजसभा जैसा हो जाता है। सभा का हर श्रोता अपने आप को भाग्यशाली समझता है। उसे लगता है जैसे वह देववाणी सुन रहा है। वह अनुभव करता है कि उसने अपने जीवन का संपूर्ण पूण्य रस प्राप्त कर लिया है !

वे अपनी इस कला के माध्यम से साहित्य जगत में भी सम्माननीय है। बड़े-बड़े साहित्यकार उन्हें अध्यक्षीय भाषण के लिए बुलाते हैं और अपनी रचनाओं का पाठ भी उनसे ही करवाते हैं। लेखक अपनी ही रचनाओं का रस लेते हैं और अध्यक्ष यश प्राप्त करते है। अपने अध्यक्षीय भाषणों से उन्होंने साहित्य की कितनी ही मरणासन्न अवस्था में पहुंच गई पत्रिकाओं को जीवनदान प्रदान किया है। अपने भाषणों में वे अक्सर साहित्य सेवा की बातें करते हैं। साहित्यकारों ने भी उन्हें सच्चा साहित्य सेवक मान लिया है। इस सेवा से प्रभावित होकर कई साहित्यिक संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित किया है। अब तो उन्हें लिटरेचर-फेस्टिवलों में भी अध्यक्षीय भाषण देने बुलाया जाता है। इन फेस्टिवलों में अधिक अध्यक्षता करने से उनका वजन दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है और उनके भाषण का वजन कम होता जा रहा है। यह चिंता उन्हें कभी-कभी चिंतित करती है !
            
              


जीवन की प्रौढ़ बेला में ही उन्होंने सफेदी की झंकार प्राप्त कर ली है। वे यह चाहते भी थे। जनता उन्हें अध्यक्ष की उम्र के लायक जो समझे। आखिर अध्यक्ष के तौर पर दिनोंदिन उनकी पहचान बढ़ती जा रही है। अब तो उन्हें अपने राज्य की राजधानी में भी अध्यक्षीय भाषण के लिए बुलाया जाने लगा है। उन्होंने उसके लिए अलग से महँगे कपड़े बनवा लिये है। लिट-फेस्टिवल का बजट देखते हुए लगता है अग्रिम मानदेय मिला गया हो ! वे यही रूकने वाले नहीं है। उनका सपना है कि वे एक दिन राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भी “#अध्यक्षीय_भाषण” के लिए आयोजकों की सबसे पहली पसंद बने....!!


भूपेन्द्र भारतीय 
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com 

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