Saturday, December 10, 2022

ईवीएम की प्रचंड जीत....!!

 ईवीएम की प्रचंड जीत....!!

      



आखिर ईवीएम की प्रचंड जीत का सपना सच हो ही गया। उसने सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास जीत ही लिया। इस बेचारी ईवीएम को क्या नहीं कहा गया ? उसे क्या-क्या नहीं सहना पड़ा ! विगत दो दशकों से उसे मुन्नी से भी ज्यादा बदनाम किया जा रहा था। जिस तरह नयी नयी बहु के हर काम में मीनमेख निकाला जाता है विगत एक दशक से ईवीएम प्रताड़ित हो रही थी। आखिर उसके सास-ससुर लोकतंत्र की मेहरबानी उसपर भी हो ही गई और उसे जनतंत्र में जीत का स्वाद चखने का अवसर मिल गया। लंबी बदनामी के बाद ईवीएम को किसी तरह के आरोप-प्रत्यारोप का सामना नहीं करना पड़ा।

इस बार के तीन राज्यों के चुनावी परिणामों से लोकतंत्र के तीनों स्तंभ भी चैन की साँस ले रहे है। लोकतंत्र भी इस बार बदनाम होने से बच गया। असहिष्णुता व ध्रुवीकरण जैसे राग दरबारी राग किसी टीवी बहस में सुनने को नहीं मिले। हर दल अपनी अपनी जीत में मगन है। मतदाता भी तन कर कह रहा है कि देखा कैसे सबको खुश कर दिया ! ‛भले बाद में ये तीनों मिलकर उसपर हँस रहे होगें।’ लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुत कम बार ऐसा हुआ कि मतदाताओं ने भी चमत्कार किया हो ओर वह भी लोकतांत्रिक पद्धति द्वारा।
 
   


लेकिन कुछ भी कहो इन चुनावों में ईवीएम की प्रचंड जीत तो हुई है। कुछ दलों द्वारा उसकी विश्वनीयता लंबे समय से संदिग्ध माना जा रही थी। जब से ईवीएम से चुनाव हो रहे है, हारने वाला अपनी हार का ठिकरा ईवीएम पर ही फोड़ता आ रहा है। पहली बार किसी भी पार्टी प्रवक्ता के मुँह से एक गलत शब्द ईवीएम के चरित्र पर नहीं निकला। ईवीएम लंबी उम्र के बाद अब चैन की साँस लेकर अपने आप पर गर्व कर सकती है। लगता है वह जवानी की दहलीज पर पहुंच गई है।
ऐसा ही चलता रहा तो हो सकता है कि आगे चलकर साहित्यिक व सहकारिता संगठनों के चुनाव भी ईवीएम से हो। पुरस्कारों का चयन भी ईवीएम के माध्यम से होना शुरू हो जाये और पुरस्कारों की रेवड़ी बटना बंद हो।

अब ईवीएम हमारे लोकतंत्र में सुरक्षित है। आगे किसी भी तरह के चुनाव करवाने के लिए वह प्रथम पसंद मानी जाऐगी। शहरों के महिला क्लबों के चुनाव के लिए भी अब ईवीएम पर भरोसा किया जा सकता है। कोई बड़ी बात नहीं कि आगे चलकर वर-वधु के जोड़े बनाने का भार भी ईवीएम के कंधों पर आ जाए।

ईवीएम अब सेटिंग का विषय नहीं रहेगी। उसे कोई शक की नजर से भी नहीं देखेगा। हर मतदाता पूरे आत्मविश्वास व बगैर किसी लघु-दीर्घ शंका के ईवीएम का बटन दबाने घर-घर से निकलेगा। लोकतंत्र की समृद्धि के लिए घर-घर से ज्यादा से ज्यादा मतदाता निकलेगें। ईवीएम के लिए कितना बड़ा गौरवमयी समय रहेगा।
अब तो लोकतांत्रिक व्यवस्था की स्वच्छता सूची में ईवीएम का नंबर भी स्वर्ण अक्षरों से लिखा जा सकता है। एग्जिट पोल वाले भी ईवीएम के परिणामों से खुश हैं। वैसे उन्होंने अपने सर्वे को ही श्रेष्ठ बताया और ब्रेकिंग न्यूज़ में यही धमाका करते रहे कि “हमारे चुनावी रूझानों ने ईवीएम की विश्वनीयता पर भी मोहर लगा दी है...!” किसी धाकड़ एंकर ने ईवीएम के परिणामों पर कोई पलटवार नहीं किया। सभी राजनीतिक दल भी खुशी-खुशी अपनी ही पार्टी द्वारा आर्डर किये लड्डू से अपना ही मुँह मीठा कर रहे हैं। ईवीएम की इस प्रचंड जीत पर लोकतंत्र में खुशी की लहर चल रही है। हो सकता है अगले गणतंत्र दिवस की परेड में लोकपथ पर ईवीएम की झांकी से सर्वदलीय खुशी देखी जा सकती हो। हो सकता है भारत के सबसे वयोवृद्ध राजनीतिक दल अपने अगले अध्यक्ष के चुनाव के लिए ईवीएम से ही मतदान करवाये। देखना यह है कि ईवीएम को मिली यह प्रचंड बहुमत वाली जीत कितने दिनों तक सुरक्षित रहेगी और कबतक राजनीतिक लांछन से बच पाती है....!!



भूपेन्द्र भारतीय 
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
जिला देवास, मध्यप्रदेश(455118)
मोब. 9926476410
मेल- bhupendrabhartiya1988@gmail.com 

No comments:

Post a Comment

हिंदू उत्ताराधिकार विधि पर पुनर्विचार हो....

हिंदू संस्कृति व समाज व्यवस्था में दो सबसे महत्वपूर्ण संस्था है पहली परिवार व दूसरी विवाह। पहला हिन्दू परिवार कब बना होगा यह अनंत व अनादि का...