जीवन जीने के लिए है, मिटाने के लिए नहीं...!
आत्महत्या एक कायराना व बुजदिल कृत्य है जो कि हमारे समाज में दिनोंदिन न जाने क्यों बढ़ती जा रही हैं ! क्या हम गलत विकास की परंपरा व नीतियों की तरफ जा रहे हैं जिससें हमारा युवा आत्महत्या की ओर जा रहा है ? किसी परीक्षा में कम नंबर आना, अच्छा मोबाइल-कार नहीं होना, पारिवारिक तनाव, सरकारी नौकरी नहीं होना आदि जैसी छोटी-छोटी बातों के कारण आजकल युवा व बड़े भी आत्महत्या जैसा कायराना कृत्य करते है। आत्महत्या जैसे कृत्य को किसी भी तरह से इस पीढ़ी को मिटाना होगा। समाज के जिम्मेदार लोग व अभिभावक इस ओर विशेष ध्यान दे।
आखिर क्या कारण है कि भगवान व प्रकृति की सबसे सुंदर रचना जीवन ओर वह भी मानव जीवन को हम इतने सस्ते में आत्महत्या के भेंट चढ़ा रहे ! ऐसा करते समय उन माँ बाप के बारे में कोई कुछ क्यों नहीं सोचता है जो हमें कई परेशानियों व मुश्किलों से पालते पोसते हैं तथा जीने लायक बनातें हैं। हर एक इंसान के जीवन में प्रकृति ने कुछ न कुछ संघर्ष दिया है। हम संघर्ष से भाग नहीं सकते हैं। जिंदगी जीने के लिए संघर्ष तो करना ही पड़ेगा। संघर्ष में ही जीवन की असल खुशी व आनंद छूपे रहते हैं।
कैसा भी जीवन हो लेकिन आत्महत्या कभी भी सही कदम नहीं हो सकता, ना ही यह कोई विकल्प हैं जीवन के संघर्ष के लिए। दुनिया में हर इंसान को हजारों परेशानिया रहतीं हैं लेकिन फिर भी जीने का एक ही तरीका है कि जीने के लिए संघर्ष करो, जो हैं वहीं स्वीकारों व परिस्थितियों से मुकाबला करो। जीवन एक सुंदर व सुहाना सफर हैं इसकी यात्रा करो, इससे भागों मत। इस यात्रा में माना कि बहुत सी कठिनाई आ सकती है लेकिन उनके बाद ही जीवन का असल मूल्य भी हमें पता चलता है। जीवन से भागना कायरता ओर वही आत्महत्या नपुंसकता हैं।
हो सकता है जिन परिस्थितियों में आप है तथा वे आपके अनुकूल नहीं है तो थोड़ा अपनी कार्य शैली व विचारों में बदलाव लाए, कही घुमने चले जाए, कुछ नया पढ़े, कुछ नए मित्र बनाए, गरीब लोगों के बीच जाए, अपने से छोटे लोगों को देखे कि वे कितना संघर्ष कर रहे हैं ओर फिर देखेगे कि आप तो सुखी हैं। हमेशा किसी एक लक्ष्य पर नहीं रूके, क्योंकि जिंदगी का सफर व मंजिल बहुत बार रास्ते बदलने से सुहानी व सुखद हो जाती हैं। आत्महत्या कभी भी जीवन को सार्थक व परिपूर्ण आनंद नही दे सकती हैं। आत्महत्या का प्रयास या फिर इस जैसे कृत्य करकें आप अपराध करतें हैं। ऐसा अपराध न करें। यह प्रकृति व ईश्वर की मानहानि है। कैसी भी सुंदरता व सुख जीवन को जीने में है ना की जीवन को कायरतापूर्ण मिटाने में ।
हमेशा ध्यान रखें, आप अकेले नहीं है जिसके जीवन में परेशानीयाँ हैं। सबके साथ ऐसा होता है। एक या दो अदद मित्र या साथी जरुर बनाए , जिससें आप अपनी सब तरह की बातें व परेशानियां उनसे साझा कर पाए। वो मित्र व साथी कोई भी हो सकता है आपकी माँ, पिता, भाई, बहन, पत्नी, प्रेमिका, दोस्त आदि कोई भी। जब भी कोई कठीन परिस्थिति आए या आपको ऐसा लगता है कि आप जीवन के संघर्ष व जटिलताओं से हार रहे हैं तो माता-पिता से जरुर साझा करे या माँ के चरणों में बैठ जाए, सबकुछ सही हो जाएगा। लेकिन छोटी छोटी बातों से तनाव में आ जाना व आत्महत्या कर लेना पुरी तरह से गलत है। हमें अपने शारीरिक स्वास्थ्य के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य का भी सतर्कता के साथ ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि कहा भी गया है कि “मन चंगा तो सब चंगा”...!
वर्तमान समय में बाजारवाद व पूँजीवाद को समझे ,इनके कारण से बहुत सी आपकी मानसिक परिस्थितियां इनके अधीन है इनसे मुक्त रहे। आज की गलाकाट प्रतियोगिता के चक्कर में न पड़े तथा अपनी महत्वाकांक्षाओं को नियंत्रण में रखें। पड़ोसी कौन सी कार लाया हैं या दोस्त कितना पैसा कमा रहा है उससे आपका कुछ भी भला नहीं होगा। किसी के देखादेखी जीवन नहीं जीना चाहिए ना ही किसी भी तरह की अनुचित होड़ा-होड़ी करना चाहिए। आपनी स्वतंत्र सोच व विचार रखें, किसी के देखा देखी जीवन न जीए। स्वंय की क्षमताओं व योग्यताओं से अपने जीवन के लक्ष्य बनाएं तथा हमेशा एक ही लक्ष्य पर भी न अड़े रहे। क्योंकि जीवन आनंद लेने के लिए हैं न कि अपने आप को तनाव की भट्टी में जलाकर आत्महत्या कर लेना है।
जब भी ऐसा लगें कि जीवन में मजा नहीं आ रहा है या असफलता ही असफलता हाथ लग रही हैं तो कहीं घुमने चले जाए, कोई नई किताब पढ़े, गांव देहात में चले जाए या कोई नया शहर घुम आए, अपने बच्चों या पत्नी के साथ समय बिताए या प्रेमिका के साथ बैठकर बातें करे। आपको ऐसा लगे हम तो बहुत गरीबी या संघर्ष में जी रहे हैं तो गांव-देहात में जाकर जीवन देखे, वही गांव वाले शहर वालों का जीवन देख ले। बड़ा पद या अच्छा पैसा कभी जीवन का अंतिम औचित्य व सफलता नहीं है। इसके आलावा भी जीवन बहुत सुंदर व आनंदमय हैं। लेकिन एक या दो असफलता या थोड़े बहुत आभावों के कारण आत्महत्या कर लेना कायरता तो हैं ही साथ ही अपने माता पिता व प्रकृति को धोखा देना है।
हमें हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि व्यक्ति की मौलिकता से छेड़छाड़ न करें। खासकर बच्चों पर कुछ भी न थोपे, उन्हें सहज आगे बढ़ने दे। अभिभावक अपने सपनों का भार अपने बच्चों के कंधों पर ना डालें। महान जीवन या व्यक्ति कुछ नहीं होता है यह तो हर इंसान का अपना मौलिक व्यक्तित्व होता है। जीवन जिंदगी को मस्ती से जीने के लिए मिला है, ना की आत्महत्या करने के लिए। जीवन ईश्वर की अनुकंपा हैं, माँ पिता का दुलार हैं, इसे आत्महत्या कर प्रकृति व मानवजीवन का अपमान व इनके साथ धोखा न करें।
भूपेन्द्र भारतीय ( अधिवक्ता व लेखक )
205, प्रगति नगर,सोनकच्छ,
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